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कोई किसी के वास्ते क़माल करता है ।
अपनी ज़िन्दग़ी का बुरा हाल करता है ।
वक़्त के रंगों में ढूँढ़ता है दर्द को-
हर घड़ी तक़दीरों से सवाल करता है ।
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कोई किसी के वास्ते क़माल करता है ।
अपनी ज़िन्दग़ी का बुरा हाल करता है ।
वक़्त के रंगों में ढूँढ़ता है दर्द को-
हर घड़ी तक़दीरों से सवाल करता है ।
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